BRIJ SACHDEVA HINDI







जितना अधिक आप पढ़ेंगे, उतना अधिक ज्ञान अर्जित करेंगे।






जितना अधिक आप पढ़ेंगे, उतना अधिक ज्ञान अर्जित करेंगे।
जितना ज़्यादा आप अपने मन को नई अवधारणाओं और विचारों के संपर्क में लाएँगे, उतना ही ज़्यादा आपको अपने ज्ञान में कमियाँ नज़र आएंगी। अज्ञानता के ये अंतराल कमज़ोरी या असफलता के संकेत नहीं हैं। यह कोई निराशाजनक स्थिति नहीं है। यह विकास है। यह प्रगति है, क्योंकि यह एहसास कि आप सब कुछ नहीं जानते, सच्ची आलोचनात्मक सोच का आधार है।

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